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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक स्वरूप और जलवायु के संदर्भ में, राज्य में ग्रीष्मकाल के दौरान चलने वाली अत्यधिक गर्म, शुष्क और धूलभरी हवाओं (लू) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन भौगोलिक एवं मौसमी दृष्टिकोण से सर्वाधिक उपयुक्त और तार्किक है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
उत्तर प्रदेश में ग्रीष्मकाल (विशेषकर मई और जून के महीनों में) में चलने वाली 'लू' (Loo) अत्यधिक गर्म, शुष्क और प्रखर हवाएं होती हैं। इनकी उत्पत्ति मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिम भारत के थार मरुस्थल और पाकिस्तान के गर्म शुष्क क्षेत्रों से होती है, जो पूर्व की ओर बहते हुए उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और मध्य मैदानी भागों (जैसे आगरा, मथुरा, कानपुर, लखनऊ आदि) के तापमान को अत्यधिक बढ़ा देती हैं। अतः विकल्प (b) इस मौसमी परिघटना की भौगोलिक और वैज्ञानिक दृष्टि से सबसे सटीक व्याख्या करता है।
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उत्तर प्रदेश की मृदा संरचना और कृषि जलवायु क्षेत्रों (Agro-climatic Zones) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उत्तर प्रदेश को कुल 9 (नौ) कृषि-जलवायु क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, जो राज्य की भिन्न-भिन्न मृदा, तापमान और वर्षा की स्थिति को दर्शाते हैं।
2. उत्तर प्रदेश के पश्चिमी मैदानी क्षेत्र में मुख्य रूप से बलुई-दोमट और जलोढ़ मृदा पाई जाती है, जो गन्ने और गेहूँ की खेती के लिए सर्वाधिक उपयुक्त मानी जाती है।
3. राज्य के बुंदेलखंड क्षेत्र में पाई जाने वाली 'मार' (Mar) और 'काबर' (Kabar) मृदाएँ अत्यधिक उपजाऊ चिकनी मिट्टी होती हैं, जिनमें नमी धारण करने की क्षमता बहुत अधिक होती है और इन्हें जुताई के लिए अत्यधिक भारी वर्षा की आवश्यकता नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और दर्शन के संदर्भ में, 'चार्वाक दर्शन' (लोकायत दर्शन) और उसके भौतिकवादी सिद्धांतों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चार्वाक दर्शन भारत का एकमात्र प्रमुख प्राचीन नास्तिक (Heterodox) दर्शन है जो वेदों की प्रमाणिकता को पूरी तरह अस्वीकार करता है और इसे केवल 'धूर्तों की रचना' मानता है।
2. इस दर्शन के अनुसार इस जगत की उत्पत्ति पृथ्वी, जल, तेज (अग्नि) और वायु- इन चार महाभूतों से हुई है, और चेतना या आत्मा इन तत्वों के विशिष्ट संयोग से उत्पन्न होने वाला एक आकस्मिक गुण है, जो शरीर के नाश के साथ ही समाप्त हो जाता है।
3. चार्वाक दर्शन मोक्ष या पुनर्जन्म के सिद्धांत को नहीं मानता और 'यावज्जीवेत् सुखं जीवेत्, ऋणं कृत्वा घृतं पिबेत्' (जब तक जियो, सुख से जियो, ऋण लेकर भी घी पियो) के माध्यम से जीवन के एकमात्र उद्देश्य 'सुखवाद' (Hedonism) या भौतिक सुख को स्थापित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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हिंदी भाषा और व्याकरण के अंतर्गत 'संधि' और उसके भेदों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'व्यंजन संधि' के नियमों के अनुसार यदि किसी वर्ग के पहले वर्ण (क्, च्, ट्, त्, प्) के आगे कोई स्वर, किसी वर्ग का तीसरा या चौथा वर्ण अथवा अंतःस्थ व्यंजन (य, र, ल, व) आए, तो पहले वर्ण के स्थान पर उसी वर्ग का तीसरा वर्ण (जैसे क् का ग्, त् का द् आदि) हो जाता है, जिसका एक प्रसिद्ध उदाहरण 'वाग्मी' या 'वागीश' (वाक् + ईश) है।
2. 'विसर्ग संधि' में यदि विसर्ग (ः) के पहले 'इ' या 'उ' हो और उसके बाद विसर्ग के आगे 'र्' आए, तो विसर्ग का लोप हो जाता है तथा उससे पहले का ह्रस्व स्वर दीर्घ (इ/उ) में बदल जाता है, जैसे 'नी + रस = नीरस' और 'दु + राज = दुराज'।
3. 'स्वर संधि' के 'अयादि संधि' नियम के अनुसार यदि ए, ऐ, ओ, औ के बाद कोई भी असमान स्वर आए, तो ए का 'अय', ऐ का 'आय', ओ का 'अव' और औ का 'आव' हो जाता है, जिसके अंतर्गत 'पौ + अन = पावन' शब्द का निर्माण होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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उत्तर प्रदेश के भौगोलिक एवं भूगर्भीय संरचना के संदर्भ में, राज्य के दक्षिणी पठारी प्रदेश (बुंदेलखंड क्षेत्र) की मुख्य चट्टानों और उनकी विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है?
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हिंदी भाषा शिक्षण में 'पठन कौशल' (Reading Skill) के विकास के दौरान 'मौन पठन' (Silent Reading) का मुख्य उद्देश्य क्या होता है, और यह सस्वर पठन की तुलना में किस प्रकार श्रेष्ठ माना जाता है?
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