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Indian Polity
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संविधान का कौन सा भाग 'निर्वाचन' से संबंधित है?

Detailed Explanation

भाग 15 में निर्वाचन का उल्लेख है।
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चार्टर अधिनियम, 1853 (Charter Act of 1853) के प्रावधानों और ब्रिटिश कालीन संवैधानिक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस अधिनियम द्वारा पहली बार गवर्नर-जनरल की परिषद के विधायी और कार्यकारी कार्यों को पृथक् किया गया तथा विधायी कार्यों के लिए 'केंद्रीय विधान परिषद' (Central Legislative Council) के रूप में एक अलग 12 सदस्यीय मिनी-संसद की स्थापना की गई। 2. सिविल सेवकों की भर्ती एवं चयन के लिए खुली प्रतियोगिता प्रणाली का आरंभ किया गया, जिसके तहत वर्ष 1854 में 'मैकाले समिति' (Macaulay Committee) की नियुक्ति की गई, और यह व्यवस्था भारतीयों के लिए भी खोल दी गई। 3. इस अधिनियम के द्वारा बंगाल के लिए एक पृथक् लेफ्टिनेंट गवर्नर की नियुक्ति की गई ताकि गवर्नर-जनरल को बंगाल के प्रत्यक्ष प्रशासनिक भार से मुक्त किया जा सके, जिससे वह पूरे भारत के प्रशासन पर अधिक प्रभावी नियंत्रण रख सके। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) और अधीनस्थ न्यायालयों (Subordinate Courts) की शक्तियों, संरचना तथा क्षेत्राधिकार के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 227 के अनुसार प्रत्येक उच्च न्यायालय को अपने प्रादेशिक क्षेत्राधिकार के भीतर सभी न्यायालयों और अधिकरणों (Tribunals) पर अधीक्षण (Superintendence) करने की शक्ति प्राप्त है, और इस शक्ति में केवल प्रशासनिक नियंत्रण ही शामिल है, जबकि न्यायिक अधीक्षण या पुनरीक्षण (Judicial Superintendence) का अधिकार उच्च न्यायालय के पास नहीं होता है। 2. संविधान के अनुच्छेद 233 के अंतर्गत किसी राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति उस राज्य के राज्यपाल द्वारा राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श करके की जाती है, तथा जिला न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने वाले व्यक्ति के लिए यह आवश्यक है कि वह कम से कम सात वर्ष तक अधिवक्ता या प्लीडर रहा हो और संघ या राज्य की न्यायिक सेवा में पहले से सेवारत न हो। 3. अनुच्छेद 239 नहीं बल्कि संविधान के अनुच्छेद 236 के निर्वचन के तहत 'जिला न्यायाधीश' की परिभाषा में नगर सिविल न्यायालय का न्यायाधीश, अपर जिला न्यायाधीश, संयुक्त जिला न्यायाधीश, सहायक जिला न्यायाधीश, लघु वाद न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश, मुख्य प्रजि magistrate और सत्र न्यायाधीश आदि सम्मिलित किए गए हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारत के उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद के संवैधानिक प्रावधानों, शक्तियों और उनकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 63 के अनुसार भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा, जो राज्य सभा का पदेन सभापति होता है, और जब वह राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है या उसके कृत्यों का निर्वहन करता है, तब उसे राज्य सभा के सभापति के रूप में मिलने वाले वेतन और भत्ते प्राप्त नहीं होते बल्कि उसे राष्ट्रपति के वेतन और भत्ते प्राप्त होते हैं। 2. अनुच्छेद 75(1) के अंतर्गत प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की सलाह पर की जाती है, किंतु मंत्रिपरिषद में कुल मंत्रियों की संख्या (प्रधानमंत्री सहित) लोकसभा के सदस्यों की कुल संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती, और यह प्रावधान मूल संविधान में ही निहित था जिसे बाद में संशोधित किया गया। 3. सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत के तहत अनुच्छेद 75(3) में यह स्पष्ट किया गया है कि मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, जिसका अर्थ यह है कि यदि लोकसभा द्वारा मंत्रिपरिषद के विरुद्ध कोई अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दिया जाता है, तो केवल संबंधित विभाग के मंत्री को ही त्यागपत्र देना पड़ता है, पूरी मंत्रिपरिषद को नहीं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य विधानमंडल की विधाई शक्तियों, विधानसभा और विधान परिषद के अंतर्संबंधों तथा धन विधेयक के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 197 के अनुसार, यदि विधान परिषद द्वारा किसी साधारण विधेयक को अस्वीकार कर दिया जाता है या विधान परिषद के संशोधनों से विधानसभा सहमत नहीं होती है, तो विधानसभा उस विधेयक को दोबारा पारित कर सकती है, और विधान परिषद इस विधेयक को अधिकतम चार महीने (प्रथम बार तीन महीने और पुनः भेजने पर एक महीना) तक ही रोक सकती है। 2. धन विधेयक (Money Bill) के संबंध में विधान परिषद की शक्ति अत्यंत सीमित होती है; विधानसभा द्वारा पारित धन विधेयक जब विधान परिषद के पास भेजा जाता है, तो विधान परिषद को उसे बिना किसी संशोधन या अपनी सिफारिश के अधिकतम 14 दिनों के भीतर विधानसभा को लौटाना होता है, और यदि वह ऐसा नहीं करती है, तो उस अवधि की समाप्ति पर वह विधेयक दोनों सदनों द्वारा उसी रूप में पारित मान लिया जाता है जिस रूप में वह विधानसभा द्वारा पारित किया गया था। 3. अनुच्छेद 169 के अंतर्गत किसी राज्य में विधान परिषद के सृजन या उत्सादन के लिए संसद द्वारा विधि बनाई जाती है, जिसके लिए यह अनिवार्य है कि संबंधित राज्य की विधानसभा अपने कुल सदस्यों के बहुमत तथा उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से इस आशय का संकल्प पारित करे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों (अनुच्छेद 5-11) और नागरिकता अधिनियम, 1955 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 9 के अनुसार, यदि भारत का कोई नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता अर्जित कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाएगी, और यह नियम युद्ध काल या आपातकाल (Emergency) की स्थिति में भी समान रूप से लागू रहता है। 2. नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत भारत में नागरिकता प्राप्त करने के पाँच तरीके बताए गए हैं—जन्म द्वारा, वंश द्वारा, पंजीकरण द्वारा, देशीयकरण द्वारा और भूमि के अर्जन द्वारा। 3. नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 के अंतर्गत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के प्रवासियों को अवैध प्रवासी नहीं माना जाएगा और उन्हें देशीयकरण (Naturalisation) के माध्यम से नागरिकता प्रदान करने के लिए निवास की आवश्यक अवधि को 11 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष कर दिया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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